यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग में भारत को बड़ा फायदा होता दिख रहा है। भारत में गेहूं की कीमतें एमएसपी से ज्यादा हो गई हैं। मिस्र जैसे देश ने गेहूं के आयात के लिए भारत से संपर्क किया है। गेहूं का एमएसपी 2,050 रुपये ही है, जबकि बाजार में दाम बढ़कर 2,250 से लेकर 2,300 रुपये तक हो गया है। इसके अलावा भारत को रूस से सस्ता कच्चे तेल भी मिलने जा रहा है। रूस ने भारत को इस साल 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल देने का फैसला लिया है। इसके अलावा इस पर 35 डॉलर प्रति बैरल तक का डिस्काउंट भी दिए जाने की तैयारी है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि रूस ज्यादा से ज्यादा तेल भारत को बेचने चाहता है क्योंकि पश्चिमी देशों की ओर से लगी पाबंदियों के चलते वह मुश्किल के दौर में है।
एशिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश भारत उन देशों में से एक है, जिसने अंतरराष्ट्रीय दबावों और पाबंदियों के बीच भी रूस से तेल की खरीद को बढ़ाने का फैसला लिया है। दरअसल अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस से तेल के आयात में कमी करने का फैसला लिया है। ऐसे में रूस एशिया में ही तेल के खरीददारों की तलाश करने में जुटा है। खासतौर पर चीन और भारत से रूस को बड़ी उम्मीद है। दोनों ही देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत कई मंचों पर रूस का विरोध नहीं किया है और उसके खिलाफ लाए गए प्रस्तावोंरूस ने भारत को तेल की खरीद में रुपये-रूबल पेमेंट सिस्टम को भी अपनाने की सुविधा देने की बात कही है। यह स्थिति भारत के लिए और अच्छी होगी और उसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार से खर्च नहीं करना होगा। हालांकि अभी इस पूरे मामले पर मुहर नहीं लगी है। रूस के विदेश मंत्री सेरजे लावरोव गुरुवार को दो दिन के भारत दौरे पर आए हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान इस मसले पर बातचीत हो सकती है। रूस से तेल की खरीद की प्रक्रिया भारतीय कंपनी इंडियन ऑइल के जरिए होगी। अभी यह जानकारी नहीं है कि अधिकतम कितने तेल की खरीद भारत करेगा, लेकिन कम से कम 15 मिलियन बैरल का आयात करने पर सहमति बन सकती है।












