उत्तराखंड के धराली में आई आपदा ने सहारनपुर के गंगोह कस्बे के दो परिवारों से उनके घर के सहारे छीन लिए. पांच दिन तक अपनों की तलाश में भटके परिजन अब लौट तो आए हैं, लेकिन दिलों में अब भी एक उम्मीद बाकी है.गौरतलब है कि जुखेड़ी निवासी 22 वर्षीय मुकेश और 19 वर्षीय दीपांशु जिस जगह रहते थे, वहां अब करीब 70 फीट मलबा जमा है. हादसे के दिन सुबह आखिरी बार मुकेश ने पिता से बात की थी और कहा था कि बारिश के कारण वह काम पर नहीं जाएगा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद सबकुछ बदल गया.
गौरतलब है कि मुकेश बीए प्रथम वर्ष का छात्र था और पढ़ाई के साथ वेल्डिंग का काम करता था. पिता की बीमारी के बाद उसने कर्ज लेकर मशीन खरीदी थी. वहीं दीपांशु इंटर के बाद पढ़ाई छोड़कर परिवार का सहारा बना था. अब सात दिनों से इन घरों में चूल्हा नहीं जला है. दोनों परिवारों की माताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की अपील की है. यह त्रासदी एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आपदा प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य कितनी तेजी और मजबूती से हो रहे हैं. फिलहाल, गंगोह के इन दो घरों में समय जैसे ठहर गया है.
लापता लोगों की तलाश जारी
उत्तरकाशी जिले के धराली में बीते 5 अगस्त को बादल फटने से आई प्राकृतिक आपदा के बाद से अब तक राहत और बचाव कार्य जारी है. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी तक लापता है, जिनकी तलाश जारी है. हालांकि स्थानीय लोग यह मानते हैं कि असली संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.










