पुस्तक समीक्षा: “परिष्कृत आगाज”
संपादक डेस्क, अभी हाल में प्रकाशित डॉ अनुजा अमेरी की पुस्तक “परिष्कृत आगाज ” महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के बेहतरीन पहल है।कवियत्री ने कविता के माध्यम से समाज के मूल समस्या को जड़ से मिटाने के लिए नारी शिक्षा पर जोर दिया है।
महिलाओं और लड़कियों को हर चुनौतियों का सामना करने का आह्वान किया है।कवियत्री ने महिलाओं को उसकी सोचनीय दशा से लड़ने के लिए उसे सभी सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने के लिए ललकारा है। इस पुस्तक में एक कविता “लड़किया छोड़ दे आगे बढ़ना !” बड़ा व्यंगात्मक है जिसमें प्रत्यक्ष रूप से समाज से प्रश्न है तथा लड़कियों से हर परिस्थिति में आगे बढ़ने के लिए कहा गया है।ऐसी ही एक और कविता “मुझमें ऐसा अंदाज भरो” में एक बेटी अपने पिता को परी बनाने को नहीं कहती है। कवियत्री का आशय स्पष्ट है कि वह लड़कियों को सबल देखना चाहती ,उसे अच्छे – अच्छे उपमा से संतुष्ट होकर कमजोर बने रहना मंजूर नहीं है।यह पुस्तक अपने आप में महिला सशक्तिकरण के ओज से भरा है।समाज के हर वर्ग के लोग इस पुस्तक को पढ़ सकते हैं क्यों कि महिला सशक्तिकरण की बात करता यह पुस्तक की तह में समाज हित का संदेश छुपा है इसे झुठलाया नहीं जा सकता












