अब पूरा देश कोविड -19 के प्रसार से मुक्त होने की कोशिश कर रहा है, बड़ी संख्या में लोग जो संक्रमण से उबर चुके हैं, वे अभी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, और ‘पोस्ट कोविड’ लक्षणों से पीड़ित हैं। अब तक देश भर में 80 करोड़ लोगों को टीका लग चूका है। इस कोरोना काल में खास कर पिछले लॉकडाउन के दौरान लोगों ने आयुर्वेद की तरफ रुख़ किया। कोरोना में आयुर्वेद ने लोगों को स्वस्थ रखने में भूमिका निभायी है। इस बीच एक अज्ञात बीमारी या वायरस बच्चों को प्रभावित कर रहा है। इस संदर्भ में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ शिशिर कुमार पाण्डेय, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, बिहार सरकार, ने नूतन चर्चा से एक खास मुलाकात में इस पर चर्चा की।
प्र) इस कोरोना काल में आयुर्वेद कितना कारगर रहा?
उ) भारत में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान पोस्ट कोविड के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है। दीर्घकालिक प्रभाव जैसे थकान, सांस की तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में दर्द, पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियां, अनिद्रा, स्मृति और एकाग्रता की समस्याएं आदि। दुनिया भर में इस स्थिति को समझने, परिभाषित करने और निदान प्रदान करने के लिए अध्ययन चल रहे हैं और इस बीच लोग इस मुद्दे से निपटने के लिए विभिन्न तरीकों का सहारा ले रहे हैं। आयुर्वेदिक उपचार बहुतायत में उपलब्ध है जो ठीक होने के बाद शरीर और दिमाग के स्वास्थ्य को बहाल कर सकते हैं। आधुनिक आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, वायरस को अनुबंधित करने के बाद उच्चतम प्रतिरक्षा स्तर बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुन: संक्रमण न होने पाए और इसे कई उपायों का सहारा लेकर प्राप्त किया जा सके। जिनको भी स्मृति, आत्मविश्वास की कमी, शारीरिक कमजोरी और अनिद्रा हो रही है तो ब्राम्ही वटी सादा, अश्वगंधा चूर्ण/टेबलेट एक-एक गोली सुसुम पानी के साथ सुबह-शाम लें। इससे फायदा होगा।
प्र) वर्तमान में एक खास तरह का वायरस आया है, विशेषकर बच्चे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इससे कैसे बचा जाये?
उ) कोरोना ने बहुत प्रभावित किया है। अभी एक अज्ञात वायरस है। वायरस का प्रभाव ऋतु परिवर्तन के समय – गर्मी से बरसात की ओर, बरसात से जाड़े की ओर और फिर जाड़े से गर्मी की जब संधि काल होता है तब संक्रमण बढ़ता है और हर तरह की बीमारियां बढ़ने लगने लगती है। ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। बुखार हो रहा है। ये कम से कम 10 दिनों तक प्रभावित करता है। बच्चों को ज़्यादा प्रभावित कर रहा है। खान-पान पर ध्यान दें, सुसुम पानी पियें, एयर कंडीशन न चलाएं, ठंडा पानी न पियें, आंवले का सेवन करें।
प्र) किस तरह का खान-पान ज़रूरी है?
उ) जैसा मैंने बताया खान-पान पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी है। च्यवनप्राश खाएं, हल्की रोटी लें, पानी पियें दिन में 3-4 बार। ऐसा न हो कि एक लीटर एक बार में पी लें। त्रिभुवन कीर्ति रस एक-एक टेबलेट सुबह-शाम 4-5 दिन लें गर्म पानी के लें। साथ ही तुलसी, हल्दी लें, दूध में चीनी डाल कर हल्दी न लें बल्कि गुड़ का इस्तेमाल, साथ ही मैदा, नमक ( सेंधा नमक लें) और चीनी का सेवन न करें। सोयाबीन पनीर लें, गाय-भैंस के दूध का पनीर खाएं, रोज़ाना सुबह 10-20 मिनट विटामिन डी लें (धूप का सेवन करें), च्यवनप्राश खाने के एक-डेढ़ घंटे बाद ही खाना खाएं। सोंठ-पीपल और गोलमिर्च मिश्रित त्रिकटु लें फायदेमंद होता है। त्रिफला आधा या पौना चमच्च रात को सोते समय गर्म पानी से लें।
प्र) पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उ) पाठकों के लिए एक ही संदेश है स्वास्थ्य का ध्यान रखें। ध्यान रहे, आम जीवन में कोई भी औषधि बिना चिकित्सक परामर्श के न लें अन्यथा किसी भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यथा संभव अंडा और मांसाहार का सेवन न करें। हरी सब्ज़ी का सेवन करें। सेहत का ध्यान रखें। अगर किसी को कोई समस्या हो तो मुझे 9934030027 पर संपर्क कर सकते हैं।










