Sunday, May 24, 2026
NewsvisionLive.com
  • Login
  • होमपेज
  • राष्ट्रिय
  • राजनीति
  • प्रादेशिक
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • विविध
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • राष्ट्रिय
  • राजनीति
  • प्रादेशिक
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • विविध
No Result
View All Result
newsvisionlive
No Result
View All Result

चातुर्मास का महत्व

Newsvision Live by Newsvision Live
August 3, 2021
in विविध
Reading Time: 1 min read
0
चातुर्मास का महत्व
0
SHARES
466
VIEWS
EmailTekegramShare on FacebookShare on Whatsapp

वर्षा ऋतु के चार महीनों को ‘चातुर्मास’ कहा जाता है। इस वर्ष चातुर्मास 20 जुलाई (आषाढ़ शुद्ध एकादशी) से शुरू होकर 15 नवंबर (कार्तिक शुद्ध एकादशी) को समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार इस काल में पृथ्वी पर रज-तम की वृद्धि के कारण सात्त्विकता बढ़ाने के लिए चातुर्मास में व्रतस्थ रहना चाहिए, ऐसे शास्त्र बताता है। इन चार महीनों के काल में, भगवान विष्णु शेष शय्या पर योगनिद्रा लेते हैं। चातुर्मास को विष्णुशयन कहा जाता है तब भगवान श्रीविष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं ऐसा माना जाता है।

भगवान विष्णु की उपासना के लिए यह समय सबसे अच्छा माना जाता है। सभी तीर्थस्थान, देवस्थान, दान व पुण्य चातुर्मास में भगवान विष्णु के चरणों में अर्पण होते है। सनातन संस्था द्वारा संकलित इस लेख में हम विभिन्न दृष्टिकोणों से चातुर्मास का महत्व, चातुर्मास की वर्जित बातें और कई अन्य विषयों के बारे में जानेंगे।

RelatedPosts

हिमाचल, उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने से मचा हाहाकार

हिमाचल, उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने से मचा हाहाकार

September 18, 2025
पति राज कुंद्रा के साथ शिल्पा शेट्टी भी मुश्किल में, 60 करोड़ के फ्रॉड में केस दर्ज

पति राज कुंद्रा के साथ शिल्पा शेट्टी भी मुश्किल में, 60 करोड़ के फ्रॉड में केस दर्ज

August 14, 2025
NCR से तुरंत उठाना शुरू करो कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का लिखित ऑर्डर आया सामने

NCR से तुरंत उठाना शुरू करो कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का लिखित ऑर्डर आया सामने

August 14, 2025

काल और देवता : मनुष्य का एक वर्ष ही, देवताओं की अहोरात्र होती है। ‘समय एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, समय के आयाम बदलते हैं, यह अब अंतरिक्ष यात्रियों के अनुभव से साबित हो गया है जब वे चंद्रमा पर उतरे थे। दक्षिणायन देवताओं की रात है और उत्तरायण उनका दिन है। कर्क संक्रांति पर उत्तरायण पूरा होता है और दक्षिणायन शुरू होता है, यानी देवताओं की रात शुरू रहती है। कर्क संक्रांति आषाढ़ मास में होती है। इसलिए आषाढ़ शुद्ध एकादशी को ‘शयनी एकादशी’ कहा जाता है; क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उस दिन देवता सो जाते हैं। कार्तिक शुद्ध एकादशी देवता नींद से जागते हैं; इसलिए इसे ‘प्रबोधिनी (बोधिनी, देवोत्थानी) एकादशी’ कहा जाता है। वास्तव में दक्षिणायन छ: माह की होने के कारण देवताओं की रात्रि एक ही होनी चाहिए। लेकिन बोधिनी एकादशी तक केवल चार मास ही काफी हैं। अर्थात रात का एक तिहाई हिस्सा बचा है, और देवता जाग जाते हैं और अपना व्यवहार करने लगते हैं। नवसृष्टी की निर्मिती का ब्रम्हदेवता का कार्य शुरू रहता है और पालनकर्ता श्रीविष्णु निष्क्रिय रहते हैं इसलिए चातुर्मास को विष्णुशयन कहा जाता है। आषाढ़ शुद्ध एकादशी को विष्णुशयन, जबकि कार्तिक शुद्ध एकादशी के बाद द्वादशी को विष्णुप्रबोधोत्सव मनाया जाता है।’

विशेषताएं : इस अवधि में बारिश के कारण पृथ्वी का रूप बदल जाता है। भारी बारिश के कारण ज्यादा स्थानांतर संभव ना होने के कारण चातुर्मास का व्रत एक ही स्थान पर करने की प्रथा बन गई । इस कालावधि में सामान्यतः सभी की मानसिक स्थिति में परिवर्तन होता है और शरीर का पाचन तंत्र भी अलग प्रकार से क्रिया करता है इसीलिये इस समय कंद, बैंगन, इमली ऐसे खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी जाती है। चातुर्मास की विशेषता उन चीजों का अनुष्ठान है जो परमार्थ का पोषण करती हैं और उन चीजों का निषेध जो प्रपंच के लिए घातक हैं। चातुर्मास में श्रावण मास का विशेष महत्व है।

चातुर्मास का महत्व : देवताओं की इस नींद के दौरान, राक्षस प्रबल हो जाते हैं और मनुष्यों को परेशान करना शुरू कर देते हैं। ‘हर किसी को राक्षसों से अपनी रक्षा के लिए कुछ न कुछ व्रत अवश्य करना चाहिए’, ऐसे धर्मशास्त्र कहते हैं –

     वार्षिकांश्र्चतुरो मासान् वाहयेत् के नचिन्नर:।
     व्रतेन न चेदाप्रोति किल्मिषं वत्सरोद्भवम् ।।

अर्थ: प्रत्येक वर्ष चातुर्मास में व्यक्ति को कुछ व्रत अवश्य करना चाहिए, अन्यथा वह संवत्सरोध्दव जैसा पाप लगता है।’

चातुर्मास में व्रतवैकल्यओं का महत्व : श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक (चातुर्मास) के चार महीनों के दौरान पृथ्वी पर आने वाली तरंगों में अधिक तमोगुण के साथ यमलहरी का अनुपात अधिक होता है। उन्हें सामना करने में सक्षम होना चाहिए; इसलिए सात्त्विकता को बढ़ाना आवश्यक है। चातुर्मास में अधिक से अधिक त्यौहार और व्रत होते हैं क्योंकि त्योहारों और व्रतों के माध्यम से सात्त्विकता बढ़ती है। चातुर्मास (चार महीने) में व्यक्ति व्रतस्थ रहना होता है।

चातुर्मास में आम लोग एक तो व्रत करते हैं। पर्ण भोजन (पत्ते पर भोजन करना), एकांगी (एक समय में भोजन करना), अयाचित (बिना मांगे जितना मिल सके उतना खाना), एक परोसना (एक ही बार में सभी खाद्य पदार्थ लेना), मिश्र भोजन (एक बार में सभी खाद्य पदार्थ लेना व सब एकत्रित कर के खाना) इत्यादि भोजन के नियम कर सकते हैं । कई महिलाएं चातुर्मास में ‘धरने-पारने’ नामक व्रत करती है । इसमें एक दिन का उपवास और अगले दिन भोजन करना, ऐसे निरंतर चार महीने करना होता है । कई महिलाएं चार महीने में एक या दो अनाज पर रहती हैं। कुछ एक समय ही भोजन करती हैं। देश के आधार पर, चातुर्मास में विभिन्न रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है।

वर्षा ऋतु में हमारे और सूर्य के बीच बादलों की एक पट्टी बन जाती है। इसलिए, सूर्य की किरणें, अर्थात तेजतत्व और आकाश तत्व अन्य समय जैसे पृथ्वी नहीं पहुंच सकते हैं। फलस्वरूप वायुमण्डल में पृथ्वी और आप तत्व की प्रधानता बढ़ती है। इसलिए वातावरण में विभिन्न रोगाणुओं, रज-तम या काली शक्ति का विघटन न होने के कारण इस वातावरण में महामारी फैल जाती है और व्यक्ति आलस्य या नींद का अनुभव करता है। व्रतवैकल्यास, उपवास, सात्विक भोजन करने और नामजप करने से हम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से रज-तम का विरोध करने में सक्षम होते हैं; इसलिए चातुर्मास में व्रतवैकल्या करते हैं।

चातुर्मास में व्रत का महत्व : चातुर्मास के दौरान एक ही प्रकार का भोजन करने वाला व्यक्ति स्वस्थ रहता है। जो एक बार खाता है उसे बारह यज्ञों का फल मिलता है। जो केवल जल पीता है, उसे प्रतिदिन अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। जो केवल दूध या फल खाता है, उसके हजारों पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं। जो पन्द्रह दिनों में से एक दिन उपवास करता है, उसके शरीर के अनेक दोष नष्ट हो जाते हैं और भोजन करने के बाद चौदह दिन में उसके शरीर में जो रस उत्पन्न होता है, वह ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है इसलिए एकादशी का व्रत करना महत्वपूर्ण है। ये चार मास नामजप और तपस्या के लिए उत्तम हैं।

वर्ज्य : विष्णु को न चढ़ाए गए खाद्य पदार्थ, मसूर, मांस, लोबिया,अचार, बैंगन, बेर, मूली, आंवला, इमली, प्याज और लहसुन इस अवधि के दौरान वर्जित माने जाते हैं। चातुर्मास में मंच पर सोने के अलावा, दूसरे का भोजन, विवाह या इसी तरह की अन्य गतिविधियां यति को वर्जित है । यति को एक स्थान पर चार महीने या कम से कम दो महीने तक रहना चाहिए, ऐसे धर्मसिंधु और कुछ अन्य धर्म ग्रंथों में कहा गया है।

अवर्ज्य : चातुर्मास में हविशष्यन्ना का सेवन करना चाहिए। चावल, हरे चने, जौ, तिल, मटर, गेहूँ, समुद्री नमक, गाय का दूध, दही, घी, सौंफ, आम, नारियल, केला आदि खाद्य पदार्थ हविष्य हैं। (निषिद्ध पदार्थ हैं रज-तमगुणायुक्त, जबकि हविष्य पदार्थ सत्त्वगुणप्रधान होते हैं ।)

त्योहारों, व्रतों और उत्सवों को न केवल एक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाये, परंतु उनके पीछे के धर्मशास्त्र को जानकर अधिक श्रध्दा के साथ मनाने से चैतन्य मिलता है। यह ‘धर्मशास्त्र’ ग्रंथ में दिया गया है। आइए, हम धर्मशास्त्र के अनुसार चातुर्मास के त्योहारों, व्रतों और उत्सवों को मनाकर ईश्वरीय कृपा प्राप्त करें।

Previous Post

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार

Next Post

संसद सत्र ‘जानबूझकर’ नहीं चलने दी सरकार: विपक्षी दलों ने जारी किया बयान

Newsvision Live

Newsvision Live

Related Posts

हिमाचल, उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने से मचा हाहाकार
विविध

हिमाचल, उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने से मचा हाहाकार

September 18, 2025
पति राज कुंद्रा के साथ शिल्पा शेट्टी भी मुश्किल में, 60 करोड़ के फ्रॉड में केस दर्ज
विविध

पति राज कुंद्रा के साथ शिल्पा शेट्टी भी मुश्किल में, 60 करोड़ के फ्रॉड में केस दर्ज

August 14, 2025
NCR से तुरंत उठाना शुरू करो कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का लिखित ऑर्डर आया सामने
विविध

NCR से तुरंत उठाना शुरू करो कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का लिखित ऑर्डर आया सामने

August 14, 2025
उत्तरकाशी में फटे तीन बादल, जलशक्ति मंत्रालय ने जारी किया रिपोर्ट
विविध

उत्तरकाशी में फटे तीन बादल, जलशक्ति मंत्रालय ने जारी किया रिपोर्ट

August 6, 2025
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खबर, कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग, सरकार ने दिया यह जवाब
विविध

8वें वेतन आयोग से 30 से 40 हजार के जोरदार इन्क्रीमेंट का दावा

August 5, 2025
विविध

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, दिल्ली के एक निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज

August 6, 2025

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

बिहार को शिक्षा से सशक्त बनाने की परिकल्पना तेज – 213 प्रखंडों में कॉलेज खोलने की योजना

बिहार को शिक्षा से सशक्त बनाने की परिकल्पना तेज – 213 प्रखंडों में कॉलेज खोलने की योजना

February 8, 2026
समस्तीपुर शहर में शीघ्र लगेंगे ट्रैफिक सिग्नल

समस्तीपुर शहर में शीघ्र लगेंगे ट्रैफिक सिग्नल

February 8, 2026
बिहार में हिट मोदी-नीतीश की जोड़ी, सेक्युलर दलों का ये आखिरी चुनाव : शाहनवाज हुसैन

बिहार में हिट मोदी-नीतीश की जोड़ी, सेक्युलर दलों का ये आखिरी चुनाव : शाहनवाज हुसैन

November 15, 2025
Bihar Chunav Resuबिहार में बैलेट पेपर की गिनती शुरू, रुझानों में NDA आगे

Bihar Chunav Resuबिहार में बैलेट पेपर की गिनती शुरू, रुझानों में NDA आगे

November 14, 2025
  • होमपेज
  • राष्ट्रिय
  • राजनीति
  • प्रादेशिक
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • विविध
Call us: Amit Roy(Editor)
8210549502

© 2023 newsvisionlive.com

No Result
View All Result
  • होमपेज
  • राष्ट्रिय
  • राजनीति
  • प्रादेशिक
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • विविध

© 2023 newsvisionlive.com

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In