बिहार में सुशासन की सरकार है, लेकिन अपराध का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। आये दिन हत्या और लूट की घटनाएं सामने आ रही है। इसमें भी सबसे गंभीर मामला मुखिया की हत्या का है। मुखिया की हत्या का ग्राफ बिहार में पंचायत चुनाव के बाद तेजी से बढ़ा। मर्डर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बिहार में एक-दो नहीं 8 मुखिया की हत्या हो चुकी है। वो भी सिर्फ आठ महीनों में।
हालांकि सरकार ने जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाये हैं। लेकिन फिर भी हत्याओं का सिलसिला नहीं रुक रहा है। शुक्रवार की शाम सहरसा में फिर एक मुखिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुखिया की पहचान सौरबाजार प्रखंड के खजुरी पंचायत के रंजीत साह के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से लोगों में आक्रोश है। मुखिया हत्या के विरोध में आक्रोशित भीड़ 18 से अधिक घण्टे से मुख्य मार्ग NH-107 जामकर प्रदर्शन व नारेबाजी कर रहे हैं।
बताते चलें कि पटना में भी ऐसे ही मुखिया की हत्या कर दी गई थी। पटना के पंडारक पूर्वी से जीते मुखिया प्रियरंजन कुमार उर्फ गोरेलाल को गोली मार दी गयी थी। वहीं पटना के ही फुलवारीशरीफ प्रखंड स्थित रामपुर फरीदपुर पंचायत के मुखिया नीरज कुमार की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसी तरह पंचायत चुनाव के रिजल्ट के बाद मुंगरे के नक्सल प्रभावित धरहरा प्रखंड के अजिमगंज पंचायत के नव निर्वाचित मुखिया परमानंद टुड्डू की हत्या कर दी गई थी तो गोपालगंज जिले के थावे थाना क्षेत्र की धतीवना पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया सुखल मुसहर की हत्या का मामला भी सामने आया।
जमुई के अलीगंज प्रखंड अंतर्गत दरखा पंचायत के मुखिया जयप्रकाश प्रसाद उर्फ प्रकाश महतो को दिसंबर में मार दिया गया। भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड की बाबूबांध पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया संजय सिंह को एंबुलेंस में सवार अपराधियों ने गोलियों से भून दिया। यही नहीं, हाल ही में भागलपुर की कुमैठा पंचायत की मुखिया अनीता देवी को बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया और उनके शव को फांसी के फंदे से लटका इसे सुसाइड केस बनाना चाहा।










