न्यूज डेस्क, अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ (25 प्रतिशत टैरिफ+25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ) लागू कर दिया है। लेकिन इसमें अमेरिका ने अपने स्वार्थ का भी खास ख्याल रखते हुए भारतीय दवाइयों, स्मार्टफोन और पेट्रो केमिकल्स पर टैरिफ को लागू नहीं किया है। अमेरिका ने इन चीजों पर टैरिफ को पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। इसी तरह, उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को भारत के कुल निर्यात में रसायनों का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत है, जिसका वित्त वर्ष 2024 का निर्यात मूल्य लगभग 5.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बीते दिनों एक अनुमान में कहा टैरिफ वृद्धि से वित्त वर्ष 2026 में रासायनिक निर्यात में 2-7 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी आ सकती है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। 50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है। चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।
अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ (25 प्रतिशत टैरिफ+25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ) लागू कर दिया है। लेकिन इसमें अमेरिका ने अपने स्वार्थ का भी खास ख्याल रखते हुए भारतीय दवाइयों, स्मार्टफोन और पेट्रो केमिकल्स पर टैरिफ को लागू नहीं किया है। अमेरिका ने इन चीजों पर टैरिफ को पहले के स्तर पर ही बनाए रखा है। इसी तरह, उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को भारत के कुल निर्यात में रसायनों का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत है, जिसका वित्त वर्ष 2024 का निर्यात मूल्य लगभग 5.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बीते दिनों एक अनुमान में कहा टैरिफ वृद्धि से वित्त वर्ष 2026 में रासायनिक निर्यात में 2-7 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी आ सकती है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। 50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है। चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।
भारतीय जेनरिक दवाओं पर काफी हद तक निर्भर है अमेरिका
दरअसल अमेरिकी मार्केट में भारतीय जेनरिक दवाइयों की निर्भरता काफी है। अमेरिका में, जहां दस में से नौ प्रिसक्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के होते हैं, भारत उन जेनेरिक दवाओं का लगभग 40% उपलब्ध कराता है। ऐसे में अमेरिका में परेशानी न खड़ी हो जाए, ट्रंप ने दवा को टैरिफ से बाहर रखा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दवाइयों के मामले में भारत और अमेरिका एक-दूसरे पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। अमेरिकी बाजार तक भारत की पहुंच उसके जेनेरिक दवा उद्योग को मुनाफे में रहने में मदद करती है, जबकि अमेरिका अपनी मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त जेनेरिक दवाएं नहीं बना पाता।
किन सेक्टर पर टैरिफ का असर नहीं
निर्यात पहले टैरिफ अब कुल टैरिफ
दवाइयां 9.5 बिलियन डॉलर 0 0
स्मार्टफोन 10.6 बिलियन डॉलर 0 0
पेट्रो केमिकल 4.1 बिलियन डॉलर 6.9% 6.9%
किन सेक्टर पर होगा असर?
निर्यात पहले टैरिफ अब कुल टैरिफ
गारमेंट 3.4 बिलियन डॉलर 12% 62%
होम टेक्सटाइल 3.0 बिलियन डॉलर 9% 59%
झींगा मछली 2 बिलियन डॉलर 0 60 %
ज्वेलरी 3.6 बिलियन डॉलर 5.8% 55.8%
डायमंड 4.9 बिलियन डॉलर 0 50%
मशीनरी पार्ट्स 6.7 बिलियन डॉलर 1.3% 51.3%
ऑटो पार्ट्स 6.4 बिलियन डॉलर 1% 26-51%
मोबाइल एक्सपोर्ट का भी है बड़ा आंकड़ा
भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में मेड इन इंडिया स्मार्टफोन एक्सपोर्ट किए जाते हैं। India Briefing के मुताबिक, जुलाई में आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत 2025 की दूसरी तिमाही में अमेरिकी बाजार में शीर्ष स्मार्टफोन आपूर्तिकर्ता के रूप में चीन से आगे निकल गया है, इसकी निर्यात हिस्सेदारी साल-दर-साल 13 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई है।
1. मशीनरी और कलपुर्जे: ऑटोमोटिव पार्ट्स पर सबसे ज्यादा असर
पहले की स्थिति :
भारत ने 2024 में 19.16 बिलियन डॉलर (करीब 1.68 लाख करोड़ रुपए) के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए। इसमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, और अन्य औद्योगिक उपकरण शामिल हैं। अमेरिका कारों, छोटे ट्रकों और उनके पार्ट्स पर 25% शुल्क लगा रहा था, जबकि कॉमर्शियल वाहनों के पुर्जों पर यह शुल्क 10% था।
टैरिफ के बाद:
अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स के लिए सबसे बड़ा बाजार है। FY25 में ऑटो पार्ट्स के कुल निर्यात का लगभग 32% हिस्सा अमेरिका को गया।
टैरिफ बढ़ोतरी से 7 बिलियन डॉलर (लगभग ₹61,000 करोड़) के सालाना ऑटो पार्ट्स निर्यात में से ₹30,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
वहीं इंजीनियरिंग गुड्स छोटे और मध्यम उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो इंजीनियरिंग गुड्स के 40% निर्यात में योगदान देते हैं। इससे हजारों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
क्या कर सकता है भारत?
यूरोप (जर्मनी, UK) और ASEAN देशों (सिंगापुर, मलेशिया) में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है। भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
इंजीनियरिंग गुड्स के लिए PLI स्कीम का विस्तार करके उत्पादन लागत को कम करना, ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन पर ज्यादा असर
पहले की स्थिति :
भारत ने 2024 में अमेरिका को 14 बिलियन डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया था। इसमें स्मार्टफोन, खासतौर पर आईफोन का बड़ा हिस्सा है। भारत अमेरिका का आईफोन का सबसे बड़ा सप्लायर है। अप्रैल में जब डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार टैरिफ का ऐलान किया था उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स पर एवरेज 0.41% का टैरिफ लगता था।













