केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने माता-पीता बनने के लिए सरोगेसी (किराये की कोख) का रास्ता अपनाने वालों के लिए तीन साल का स्वास्थ्य बीमा खरीदना अनिवार्य कर दिया है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि बीमा सरोगेट मां बनने वाली महिला का होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के नए नियमों के मुताबिक, बीमा राशि कम से कम इतनी होनी चाहिए कि वह गर्भावस्था से उत्पन्न होने वाली सभी जटिलताओं के खर्चों को कवर किया जा सकें। साथ ही कहा गया है कि तीन बार से ज्यादा सरोगेट मां बनाने के लिए प्रयास नहीं किया जा सकता है।
हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भपात कानून 1971 के अनुसार, महिला को गर्भपात की अनुमति दी है। लेकिन, गर्भपात की वजह बच्चें का लिंग नहीं होना चाहिए।













